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स्टेन स्वामी की मौत पर भारतीय-अमेरिकी ग्रुप ने कहा- भारत में लोकतंत्र का काला दिन

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स्टेन स्वामी की मौत पर भारतीय-अमेरिकी ग्रुप ने कहा- भारत में लोकतंत्र का काला दिन

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भारतीय-अमेरिकी समूहों ने मंगलवार को फादर स्टेन स्वामी की मृत्यु पर दुख जताया और उन्हें एक ऐसा सामाजिक कार्यकर्ता बताया,

जिन्होंने भारत में गरीब आदिवासियों की सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। ‘इंडियन ओवरसीज कांग्रेस’ के उपाध्यक्ष जॉर्ज अब्राहम ने कहा, यह भारत में लोकतंत्र के लिए एक काला दिन है और राष्ट्रीय नेतृत्व तथा न्यायपालिका के सदस्यों को शर्म से सिर झुकाना चाहिए।

फादर स्वामी को हिरासत में लेना और जेल में उनके साथ जो व्यवहार हुआ, उस कारण उनकी मृत्यु हुई। यह राष्ट्र की चेतना पर धब्बा है और न्याय का उपहास है। स्टेन स्वामी (84) को पिछले साल गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किया गया था और सोमवार को मुंबई के एक अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई।

कई बीमारियों से पीड़ित स्वामी हिरासत में कोरोना वायरस से संक्रमित भी पाए गए थे। ‘फेडरेशन ऑफ इंडियन अमेरिकन क्रिश्चियन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ एनए’ ने एक बयान में कहा कि वह एक बहादुर व्यक्ति थे, जिन्होंने भारत में आदिवासियों की रक्षा और उनकी मदद करने के लिए अथक परिश्रम किया।

एफआईएसीओएनए ने कहा, ‘‘एक सरल एवं नम्र व्यक्ति, फादर स्वामी एक ऐसी व्यवस्था के खिलाफ खड़े थे, जो गरीब आदिवासियों और उनके संसाधनों के संप्रभु अधिकारों का शोषण करने को आमादा है।’’

आईएनओसी ने यह भी कहा कि यह कई अन्य मानवाधिकार योद्धाओं को याद करने का भी समय है, जो अब भी जेल में हैं। आपको बता दें कि स्टेन स्वामी की मौत पर देश के लोगों में भी सरकार और न्याय व्यवस्था के ऊपर गहरी नाराजगी है और उनकी मौत को ‘हिरासत में हुई मौत’ बताया जा रहा है। देशभर के अलग-अलग हिस्सों में लोग स्टेन स्वामी के लिए न्याय मांग रहे हैं।

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ (ईयू) की मानवाधिकार संस्थाओं ने आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता फादर स्टैन स्वामी के निधन को मंगलवार को दुखद और ‘परेशान करने वाला’ करार दिया तो देश के प्रमुख विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर आग्रह किया कि वह सरकार को स्वामी के साथ कथित ‘अमानवीय व्यवहार’ के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दें।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयुक्त की प्रवक्ता लिज थ्रोस्सेल ने कहा कि, ‘‘भारत के गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत 2020 में गिरफ्तारी के बाद 84 वर्षीय फादर स्टैन स्वामी की मुंबई में मृत्यु हो जाने से हम बहुत दुखी हैं।

उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘फादर स्टैन को गिरफ्तारी के बाद से बगैर जमानत के सुनवाई-पूर्व हिरासत में रखा गया,2018 में हुए प्रदशनों को लेकर आतंकवाद से जुड़े आरोप लगाये गये। संयुक्त राष्ट्र की स्पेशल रेपोर्ट्योर ऑन ह्यूमन राइट्स मैरी लॉलर ने कहा, आज भारत से बेहद दुखी करने वाली खबर आई है।

मानवाधिकार कार्यकर्ता और ईसाई पादरी फादर स्टैन स्वामी का निधन हो गया है। उन्हें आतंकवाद के झूठे आरोपों में नौ महीने तक हिरासत में रखा गया था। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को जेल में रखना स्वीकार्य नहीं है।”

इससे पहले उन्होंने स्वामी की बिगड़ती हालत पर चिंता जताई थी और उनके लिए विशेष उपचार की मांग की थी। उन्होंने स्वामी के खिलाफ आरोपों को “आधारहीन” बताया।

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