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फीस नियामक समिति बनाने आनाकानी, 240 स्कूलों की मान्यता रद्द, 132 प्राचार्यों का वेतन रोका

फीस नियामक समिति बनाने आनाकानी, 240 स्कूलों की मान्यता रद्द, 132 प्राचार्यों का वेतन रोका

फीस नियामक समिति बनाने आनाकानी, 240 स्कूलों की मान्यता रद्द, 132 प्राचार्यों का वेतन रोका

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रायपुर. स्कूलों में फीस निर्धारण के लिए नियामक समिति नहीं बनाना जिले के 240 स्कूलों काे भारी पड़ गया है। इन स्कूलों की मान्यता समिति ना बनाए जाने के चलते रद्द कर दी गई है। इन स्कूलों में जिले के कई बड़े और नामचीन स्कूल भी शामिल हैं।

शासन द्वारा आदेश जारी कर स्कूलों में फीस नियामक समिति का गठन अनिवार्यत: करने निर्देश दिए गए थे। इससे संबंधित गाइडलाइन भी महीनों पहले ही जारी की जा चुकी है। इसके पश्चात भी इन स्कूलों में समिति का गठन नहीं किया गया।

यही नहीं बिना फीस निर्धारण के लिए समिति गठित किए और फीस निर्धारण किए बगैर ही अगले सत्र के लिए अधिकतर स्कूलों में प्रवेश भी प्रारंभ कर दिया गया है। इसके साथ ही सरकारी विद्यालयों के 132 प्राचार्यों पर भी कार्रवाही की गई है।

फरवरी माह से लेकर आगामी आदेश तक प्राचार्यों का वेतन रोक दिया गया है। नोडल प्राचार्यों को अपने क्षेत्र में आने वाले निजी स्कूलों में फीस नियामक समिति गठित कराने का दायित्व सौंपा गया था। इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया था।

240 स्कूलों की मान्यता रद्द, 132 प्राचार्यों का वेतन रोका

प्राचार्यों को भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि उनके द्वारा लापरवाही बरतने के कारण समय-सीमा में कार्य पूर्ण नहीं हो सका है। तीन दिनों के भीतर प्रार्चायों को स्पष्टीकरण देने कहा गया है। केपीएस, रेडियंट वे सहित कई हैं

सूची में ना सिर्फ छोटे बल्कि कई बड़े और प्रतिष्ठित स्कूलों पर भी कार्रवाई की गई है। जिन स्कूलों की मान्यता रद्द हुई हैं उन्हें कृष्णा पब्लिक स्कूल के अधिकतर ब्रांच, सरस्वती शिशु मंदिर के कई ब्रांच, रूंगटा इंटरनेशनल स्कूल, पोद्दार इंटरनेशल स्कूल, द्रोणाचार्य पब्लिक स्कूल, शिवोम विद्यापीठ,

एमजीएम स्कूल, छग पब्लिक स्कूल, शिवांश इंटरनेशनल, लिटिल एंजिल, डेफोल्डिल्स, मां बंजारी गुरुकुल सहित 240 स्कूल शामिल हैं। इन स्कूलों को भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि उनकी मान्यता शैक्षणिक सत्र 2021-22 से समाप्त की जा रही है।

विद्यालय से संबंधित सभी दस्तावेज जिला शिक्षा कार्यालय में जमा करने कहा गया है। आदेश की अवहेलना फीस विनायमक समिति बनाए बगैर ही अगले शैक्षणिक सत्र में प्रवेश प्रारंभ कर दिया गया है। सरकारी आदेशों की धल्लड़े से अवहेलना की जा रही है।

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